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सुपौल : सुपौल में वित्त रहित शिक्षा नीति के खिलाफ महाआंदोलन, समाहरणालय में शिक्षकों-कर्मियों ने बुलंद की आवाज

Rajesh Kumar Ranjan / Thu, Aug 20, 2026 / Post views : 126

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सुपौल में वित्त रहित शिक्षा नीति के खिलाफ महाआंदोलन, समाहरणालय में शिक्षकों-कर्मियों ने बुलंद की आवाज

सुपौल, 20 अगस्त 2026। वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने, वित्त रहित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के समायोजन समेत विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को सुपौल समाहरणालय परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल की ओर से आयोजित इस आंदोलन में वित्त रहित शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की गई।

बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजय यादव ने कहा कि वित्त रहित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी पिछले चार दशकों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों में वित्त रहित संस्थानों के शिक्षक एवं कर्मी वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। सरकार को अब इस मामले में स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना चाहिए।

चार प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन

धरना-प्रदर्शन के दौरान वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने, वित्त रहित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों का समायोजन करने, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों को नियमित वेतनमान देने तथा सेवा सुरक्षा, पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

प्रो. (डॉ.) संजय यादव ने कहा कि यह लड़ाई केवल वेतन की नहीं, बल्कि शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के अधिकार, सम्मान और भविष्य की लड़ाई है। समान कार्य करने वाले शिक्षकों एवं कर्मियों को सम्मानजनक वेतनमान और सुरक्षित सेवा व्यवस्था मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बिहार के विभिन्न जिलों में वित्त रहित शिक्षक एवं कर्मी अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। सुपौल में आयोजित यह धरना भी उसी राज्यव्यापी संघर्ष का हिस्सा है।

आयोजकों ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से किया गया और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से सरकार तक वित्त रहित शिक्षक एवं कर्मियों की मांगों को मजबूती से पहुंचाने का प्रयास किया गया।

इस दौरान आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलन को लेकर जारी नारे में कहा गया— “न झुकेंगे, न रुकेंगे, न थकेंगे—संघर्ष करेंगे, संगठित रहेंगे और विजय प्राप्त करेंगे।”

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